निजी बस संचालकों ने उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन

लोक प्रेरणा. भिवानी : वरिष्ठ नागरिकों के लिए 50 प्रतिशत रियायती यात्रा पास को लेकर पिछले कुछ दिनों से निजी बस ऑपरेटरों और यात्रियों के बीच चल रहे तनातनी के माहौल में मंगलवार को एक अहम मोड़ आया। स्टेज कैरिज प्राइवेट बस वेलफेयर एसोसिएशन के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेशाध्यक्ष डा. धन सिंह के नेतृत्व में भिवानी के उपायुक्त से मुलाकात की और उन्हें एक ज्ञापन सौंपा। इस मुलाकात के दौरान उपायुक्त ने स्पष्ट आश्वासन दिया है कि चूंकि यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, इसलिए किसी भी निजी बस ऑपरेटर के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। ज्ञापन के माध्यम से निजी बस ऑपरेटरों ने प्रशासन के समक्ष मांग रखी कि परिवहन विभाग स्पष्ट आदेश जारी करे कि रोडवेज पास केवल रोडवेज बसों तक सीमित हैं, गलत और भ्रामक सूचना फैलाने वालों पर कार्रवाई हो, जनप्रतिनिधि और अधिकारी बिना पुष्टि के बयानबाजी से बचें ताकि अनावश्यक तनाव और आर्थिक नुकसान न हो, गलतफहमी के कारण हुई शिकायतों को तुरंत प्रभाव से रद्द किया जाए। एसोसिएशन ने उपायुक्त को अवगत कराया कि पिछले दिनों गांव निनान में उनके रात्रि प्रवास के दौरान कुछ मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉम्र्स पर गलत रिपोर्टिंग की गई। यह प्रचारित किया गया कि रोडवेज के रियायती पास निजी बसों में भी मान्य होंगे। इस भ्रामक सूचना के कारण बस स्टैंड और यात्रा के दौरान परिचालकों और यात्रियों के बीच आए दिन विवाद, बहसबाजी और अभद्रता की घटनाएं सामने आ रही थीं। ज्ञापन सौंपते हुए एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डा. धन सिंह ने प्रशासन के सामने आरटीआई दस्तावेज, परिवहन विभाग व आरटीए कार्यालय के आदेश और पास संबंधी शर्तें रखीं। उन्होंने तकनीकी और कानूनी पक्ष रखते हुए कहा कि वरिष्ठ नागरिकों के हरियाणा रोडवेज द्वारा जारी पास पर स्पष्ट लिखा होता है कि यह केवल सामान्य रोडवेज बसों में मान्य है। अब आधार व वोटर कार्ड के आधार पर रियायती सफर नहीं दिया जाता पास बनवाना अनिवार्य । उन्होंने कहा कि रोडवेज और निजी बसें एक-दूसरे की प्रतिस्पर्धी हैं। एक संस्था का पास दूसरी संस्था में लागू करना न तो तार्किक है और न ही कानूनी। उन्होंने कहा कि सरकार रोडवेज पास के बदले रोडवेज विभाग को भुगतान करती है,तथा इसी तरह का प्रावधान प्राइवेट बस संचालकों के लिए है किंतु आज तक प्राइवेट बस संचालकों को उनके जारी किए गए पास के बदले में भुगतान नहीं किया गया है । बिना वित्तीय प्रावधान के पास लागू करना संविधान के अनुच्छेद 300ए का उल्लंघन है। सभी तथ्यों और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद उपायुक्त ने माना कि यह विषय कानूनी पेंच में फंसा है। उन्होंने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि जब तक न्यायालय का फैसला नहीं आता, निजी बस संचालकों पर दबाव नहीं बनाया जाएगा। साथ ही उन्होंने आरटीए सचिव को निर्देश जारी करने की बात कही, ताकि जमीनी स्तर पर हो रहे विवादों और गलतफहमियों को तुरंत रोका जा सके। समस्या के स्थायी समाधान के रूप में एसोसिएशन ने नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) प्रणाली का सुझाव दिया। उनका कहना है कि सरकार को सभी लाभार्थियों (वरिष्ठ नागरिक, छात्र-छात्राए, पुलिस कर्मचारी, आदि) को एनसीएमसी कार्ड जारी करने चाहिए। इससे यात्री जिस बस में सफर करेगा, उसका किराया कार्ड के जरिए सीधे संबंधित विभाग से समायोजित हो जाएगा। इससे पास की वैधता को लेकर उठने वाले सवाल हमेशा के लिए खत्म हो जाएंगे। ज्ञापन देने के समय जिला भिवानी के प्रधान दिनेश कुमार पंडित, राजेश, सोमबीर श्योराण, जगपाल घनघस, विजयपाल इत्यादि बस संचालक मौजूद रहे।

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